चलते -चलते क्यों लगता है, एक अरसा यों ही बीत गया ,
लगता है पानी के घट से ,एक प्यासा लम्हा रीत गया |
लगता है पानी के घट से ,एक प्यासा लम्हा रीत गया |
झड़ते पत्ते यह कहते है ,मौसम का हाल बदलता है ,
पर रोज़-रोज़ यों लगता है,सूरज तो पीछे चलता है |
पर रोज़-रोज़ यों लगता है,सूरज तो पीछे चलता है |
Comments
Post a Comment